श्री चन्द्रमोहन जी का लक्ष्य है कि हिन्दुस्तान में जातिरहित एकजुटता स्थापित हो। जहां जाति व्यवस्था का कोई स्थान न हो। सभी देशवासी केवल हिन्दुस्तानी हो और कुछ नहीं। वर्तमान में हर कोई जाट,बामण, गुर्जर, सैनी, दलित इत्यादि इत्यादि में बंटा हैं जिस कारण हमारी शक्ति कमजोर हो रही है। जब तक हम जाति व्यवस्था में बंटे रहेंगे हिन्दुस्तानी खुशहाल नहीं हो सकते।
जातिरहित एकजुटता से हम सुरक्षित तो हो जायेंगे। लेकिन सम्पन्नता के लिये देश में केवल विद्यार्थी को पढ़ाई व दवाई एक समान व फ्री मिलनी चाहिये। ऐसा होने पर हम हिन्दुस्तानी सम्पन्न हो जायेंगे |
इसके लिए जातिरहित एकजुटता के आंदोलन को विराट करना पड़ेगा। आज की राजनीति जातिवाद का तो विरोध करती है लेकिन जाति का नहीं। जबकि जाति से ही जातिवाद पैदा होता है। जातिवाद का विरोध करने वाले लोग जाति सूचक शब्दों का अपने नाम के साथ प्रयोग करते हैं। ये कैसा हमारा दुर्भाग्य है कि हमारे राजनैतिक नेता जातिवाद का विरोध करते हैं और अपनी जाति से प्रेम करते हैं। इस तरह सुराज देश में कभी भी नहीं आ सकता।
जातिरहित एकजुटता के आंदोलन में शामिल होने की गरीब हिम्मत नहीं कर पाता, मध्यम वर्ग के पास समय नहीं है और अमीर इसकी जरुरत नहीं समझते जबकि ये तीनों ही ग़लतफ़हमी में है और खतरे की ओर बढ़ रहे हैं। वे अपनी और अपनी आने वाली पीढियों को भयंकर खतरे की ओर ले जा रहे है क्योंकि जाति से 5 दानव पैदा होते हैं-
(1) जातिवाद (2) क्षेत्रवाद (3) लिंगवाद (4) पूजावाद (5) पूंजीवाद
ये पांचों दानव गरीबों को, मध्यम वर्ग को और अमीरों को और उनकी आने वाली पीढ़ियों को हानि पर हानि पहुंचाते रहेंगे इसलिए जातिरहित एकजुटता के आंदोलन में शामिल होने की गरीब हिम्मत करें, मध्यम वर्ग समय निकाले और अमीर इसकी जरुरत को समझें।
सम्पन्नता के लिये देश में केवल विद्यार्थी को पढ़ाई व दवाई एक समान व फ्री मिलनी चाहिये। ऐसा होने पर हम हिन्दुस्तानी सम्पन्न हो जायेंगे। देश को चलाने के लिए और देशवासियों को संपन्न बनाने के लिए चार लोगों की जरुरत होती है-
(1) मजदूर, (2) किसान, (3) कर्मचारी, (4) व्यापारी।
अगर ऐसा हो कि देश में केवल मजदूर ही मजदूर हो, तो भी देश नहीं चल सकता। इसी तरह अगर देश में केवल किसान ही किसान हो, केवल कर्मचारी ही कर्मचारी हो, केवल व्यापारी ही व्यापारी हो तब भी देश नहीं चल सकता।
देश को चलाने के लिए मजदूर, किसान, कर्मचारी व व्यापारी इन चारों की ही जरुरत होती है। देशवासियों को संपन्न बनाने के लिए इन चारों का मजबूत होना बहुत ही जरुरी है और ये चारों (मजदूर, किसान, कर्मचारी व व्यापारी) एक साथ मजबूत तब होंगे जब देश में विद्यार्थी को पढ़ाई-दवाई-खिलाई एक समान और फ्री होगी। अर्थात् प्राईवेट स्कूल और प्राईवेट हॉस्पिटल बन्द हों और केवल सरकारी स्कूल और सरकारी हॉस्पिटल ही हों। अगर विद्यार्थी मजबूत हो गया तो मजदूर मजबूत हो जायेगा, किसान मजबूत हो जायेगा, कर्मचारी मजबूत हो जायेगा और व्यापारी भी मजबूत हो जायेगा।
मूल जड़ विद्यार्थी है। अगर हमने देश में विद्यार्थी को पढ़ाई-दवाई-खिलाई एक समान और फ्री करा दी तो कोई भी ग़रीब नहीं रहेगा।
मजदूर ग़रीब नहीं रहेगा, किसान ग़रीब नहीं रहेगा, कर्मचारी ग़रीब नहीं रहेगा और न ही व्यापारी ग़रीब रहेगा। सब संपन्न हो जायेंगे। इसलिए हम आपसे कहते हैं कि इस अभियान में आप मेरा साथ दो।
आज हमें कैसे बांटा जा रहा है? कोई किसान नेता हो जाता है, कोई मजदूर नेता हो जाता है, कोई कर्मचारी नेता हो जाता है तो कोई व्यापारी नेता हो जाता है। सब अपनी-अपनी आवाज उठाते हैं लेकिन कोई भी आज तक इन्हे मजबूत नहीं बना पाया। कोई भी आज तक इनकी गरीबी नहीं मिटा पाया। इसलिए कोई भी आज तक संपन्न नहीं बन पाया।
अगर हम इसकी जड़ अर्थात् विद्यार्थी को मजबूत बना दें अर्थात् देश में विद्यार्थी को पढ़ाई-दवाई-खिलाई एक समान और फ्री करा दें तो मजदूर, किसान, कर्मचारी, व्यापारी एक साथ मजबूत हो जायेंगे क्योंकि विद्यार्थी इन चारों में से किसी न किसी एक का ही बच्चा होगा।
माना अगर किसी मजदूर के बच्चे की पढ़ाई-दवाई-खिलाई एक समान और फ्री हो गई तो मजदूर पर भार बहुत कम हो जायेगा। ठीक ऐसे ही किसान, कर्मचारी और व्यापारी के बच्चों की पढ़ाई-दवाई-खिलाई एक समान और फ्री हो गई तो किसान, कर्मचारी और व्यापारी पर भार बहुत कम हो जायेगा। आज मजदूर, किसान, कर्मचारी व व्यापारी की कमाई का बड़ा हिस्सा पढ़ाई व दवाई पर ही खर्च होता है। इसलिए अगर हमने देश में विद्यार्थी को पढ़ाई-दवाई-खिलाई एक समान और फ्री करा दी तो मजदूर, किसान, कर्मचारी व व्यापारी मजबूत हो जायेंगे।
जब ये चारों एक साथ मजबूत हो जायेंगे तो देश मजबूत हो जायेगा। हम खुशहाल हो जायेंगे, संपन्न हो जायेंगे।