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जन पूजा

नशे का नाश हो, जाति व्यवस्था का सत्यानाश हो। "हे! जाति के मानने वालों परमात्मा तुमसे बहुत दूर है।"

नैतिक पूजा

क्रांतिकारी हमारे वास्ततिक माँ पिता से भी बढ़कर हैं। क्रांतिकारी मेरे भगवान हैं। मैं उनके सपने और सम्मान के लिये कुछ भी कर दूंगा |

अध्यात्म पूजा

अपने बनाये मंदिर में बहुत जा चुके अब परमात्मा के बनाये मंदिर (स्वयं का शरीर) में भी जाना सीखो।

संक्षिप्त परिचय -
क्रांतिकारियों के सम्मान, देशवासियों की सुरक्षा, सम्पन्नता, स्वास्थ्य व शान्ति के लिए निरंतर प्रयासरत...

श्री चन्द्रमोहन जी का जन्म सन् 1968 में आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को देवभूमि उत्तराखण्ड के पौढ़ी जिले के मंजकोट ग्राम में माता श्रीमति लीलावती जी व पिता गजेन्द प्रसाद जी के यहां हुआ। जन्म के 41वें दिन उनके गुरू श्री आनंदकंद जी महाराज ने उनका नामकरण किया चन्द्रमोहन।

श्री चन्द्रमोहन जी बचपन से ही जाति व्यवस्था से घोर घृणा करते थे। उनके गुरू श्री आनंदकंद जी के निर्देश से उन्होंने पूरे भारत का भ्रमण किया व जाति व्यवस्था के कुरूप चेहरे को जाना तब उन्होंने इस जाति व्यवस्था को हिंदुस्तान से उखाड़ फेकने का निर्णय लिया।

बिना राष्ट्र भाषा के राष्ट्र अधूरा है इसलिए हिंदी को महत्व देना जरुरी है

जाति व्यवस्था का नाश और हिंदुत्व का उत्थान

मजहब के नाम पर इंसानियत से नहीं देश के नाम पर जान से खेलो

योग का अर्थ है जुड़ना बाहर मानवता से अंदर परमात्मा से

परमात्मा पिता है प्रकृति माँ जगदम्बा है

जल और वायु के प्रति जागरूकता ही प्रकृति का सम्मान है

जो एकजुट अर्थात समूह में रहते है परमात्मा उन्हीं रक्षा करता है

पहले श्री कृष्ण की मानो फिर श्री कृष्ण को मानो तब ही क्लेशों से मुक्ति जानो

वृक्षों का सत्कार, नदियों का श्रृंगार , प्रदूषण का बहिष्कार

आस्तिक या नास्तिक बनने से पहले वास्तविक बनो



01

अध्यात्म का रहस्य

मारा शरीर अर्थात् मनुष्य शरीर परमात्मा द्वारा बनाया गया सच्चा मन्दिर है। मनुष्य के इस पांच-छः फुट के शरीर में बहुत अद्भुत रहस्य छिपे हुए हैं जिनका पता हमें अन्तः पूजा से चलता है।......

02

राम से पहले, राम को मानो

हम प्रायः यह कहते व सुनते हैं कि रामराज लाएंगे, रामराज आयेगा परन्तु जिस राम के राज को लाने की हम बात करते हैं वास्तव में हम उस राम के रहस्य को ही नहीं जान पाये।...

03

अध्यात्म का लक्ष्य है अमृत

अध्यात्म से ही अमृत की प्राप्ति होती है। अमृत प्राप्त करने के लिए ही अध्यात्म में प्रवेश किया जाता है। अमृत प्राप्त करने के बाद और कुछ प्राप्त करना शेष नहीं रह जाता ...

04

जीवन का महत्व

परमात्मा ने मनुष्य को अध्यात्म के बड़े ही गूढ़ रहस्यों के साथ धरती पर उतारा है। देवतागण भी मनुष्य योनि पाने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। ग्रन्थों में भी कहा गया-सुर दुलर्भ मानुष तन पावा।केवल मनुष्य योनि मिलने पर ही परमात्मा...

आप भी इस क्रांति यात्रा में बढ़-चढ़कर हमारा साथ दें...