श्री चन्द्रमोहन जी का जन्म सन् 1968 में आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को देवभूमि उत्तराखण्ड के पौढ़ी जिले के मंजकोट ग्राम में माता श्रीमति लीलावती जी व पिता गजेन्द प्रसाद जी के यहां हुआ। जन्म के 41वें दिन उनके गुरू श्री आनंदकंद जी महाराज ने उनका नामकरण किया चन्द्रमोहन। श्री चन्द्रमोहन जी बचपन से ही जाति व्यवस्था से घोर घृणा करते थे। उनके गुरू श्री आनंदकंद जी के निर्देश से उन्होंने पूरे भारत का भ्रमण किया व जाति व्यवस्था के कुरूप चेहरे को जाना तब उन्होंने इस जाति व्यवस्था को हिंदुस्तान से उखाड़ फेकने का निर्णय लिया।
श्री चन्द्रमोहन जी ने अपनी शिक्षा पूर्ण कर शुक्रताल के ग्राम छछरौली से अपने जातिरहित एकजुटता महाअभियान का शुभारम्भ किया। कठोर संघर्ष के बाद धीरे-धीरे लोगों को उनकी बात समझ आने लगी और 26 फरवरी 2003 को शुक्रताल में श्री परमधाम न्यास की स्थापना की गयी जहां से इस अभियान को सही दिशा दी गयी। इसके लिये उन्होंने ‘‘जनेऊँ’’ के सूत्रों से अपने अभियान की शुरूआत की और जनेऊँ शब्द के तीनों अक्षरों को अभियान के तीन स्तम्बों के समान बताया जिनमें शुरूआत उल्टी तरफ से की गयी क्योंकि जनेऊँ शरीर पर उल्टा धारण किया जाता है।
A great corporate strategy combines five elements: a bold yet realistic ambition, a carefully considered portfolio.
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